दमोह।एमपी

जिले के मढिय़ादो में बने राजा-महाराजों के किले पर छाने लगे संकट के बादल-गढ़ी को संरक्षित नही किए जाने से लुप्त होने की कगार पर

 इतिहास के पन्नों से । राजा संग्राम शाह : रायबहादुर  गौड़ राजा संग्राम शाह के समय में मढिय़ादो उनके 52 गढ़ों में शामिल था। इन गढ़ों के अंतर्गत 360 मौजे आते थे। संभावना है कि गौड़ राजा नरिंद शाह के समय यह गढ़ी बनवाई गई होगी। कालांतर में मढिय़ादो चरखारी राज्य के अधीन हो गया। मढिय़ादो में छत्रसाल के भतीजे जगत सिंह और बहलोल खान से बड़ी लड़ाई होने के प्रमाण भी मिलते हैं। पुस्तक के अनुसार उस समय गांव में कोष्टा जाति के लोग रहते थे, जो धोतियां बुनते थे। इसके अलावा गांव का एक किला जोगीडाबर जलाशय के किनारे बना है, जिसे भारतीय पुरातत्व विभाग में शामिल किया गया है। समस्या तो यह है कि देखरेख न होने से आज उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।

इतिहास पर यदि संकट मंडराने लगे तो आने वाली पीड़ी तो उसे बिसरा ही देगी। कुछ ऐसा ही मढिय़ादो में बनी गढ़ी के साथ हो रहा है। यहां बने राजा-महाराजों के किले के इर्द-गिर्द अतिक्रमण हो रहा है फिर भी प्रशासन चुप है। स्थानीय लोगों का कहना है किले, बुर्ज और बाबड़ी जैसी अमूल्य धरोहर आज हम बनवा तो नहीं सकते, हिफाजत तो कर सकते हैं। गांव में ऐतिहासिक इमारतों पर कब्जा होने लगा है। लगता है आने वाले समय में ऐसे खास स्थानों का महत्व कम न हो जाए।  कछयाना मोहल्ला की गढ़ी को लोग मुनड़ी सुरई के नाम से जानते हैं, लेकिन अब अतिक्रमण के कारण वहां जाना संभव नहीं है।

By Yusuph Pathan

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