दमोह न्यायालय का फैसला
दमोह।विगत दिनों दमोह न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश आनंद तिवारी ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निर्णय में माना है कि यदि किसी आरोपी द्वारा दिये गए चेक की तारीख मे कोई परिवर्तन या कांटछांट हुई है तो केवल इस आधार पर किसी आरोपी पर केस चलाने से नहीं रोका जा सकता।
*क्या था पूरा मामला*
अधिवक्ता व परिवादी मनीष नगाइच ने बताया के दरसल दमोह जिले के भाजपा नेता मनीष शर्मा के भाई ठेकेदार मनोज शर्मा ने उनसे 02 वर्ष पूर्व 15 लाक रु लिये थे उन 15 लाख को चुकाए जाने के एवज में आरोपी मनोज शर्मा शर्मा द्वारा एक चेक मनीष नगाइच को जारी किया था किंतु चेक राशि का भुगतान न करना पड़े इस नियत से आरोपी मनोज शर्मा ने चेक की डेट जानबूझकर दो बार लिखी मामले में न्यायालय से ज़मानत पर होने के बाद आरोपी करार दिए जाने पर आरोपी मनोज शर्मा चतुराई से न्यायालय में पहुंचा व पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर न्यायालय से निवेदन किया के चेक की तिथि में हेरफेर होने पर उसे गलत आरोपी करार दिया गया है जिस पर न्यायालय द्वारा दोनों पक्षो की सुनवाई के बाद निर्णय दिया के मात्र चेक की तारीख को दो बार लिखे जाने से आरोपी मनोज शर्मा उस पर लगे आरोपों से नहीं बच सकता तब जब के मामला 15 लाख के लेनदेन से जुड़ा हो । अधिवक्ता मनीष नगाइच की ओर से प्रस्तुत तर्क व नवीन न्याय दृष्टान्तों के आलोक में प्रधान न्यायाधीश आनंद तिवारी ने आरोपी मनोज शर्मा की याचिका खारिज करते हुए निचले न्यायालय द्वारा मनोज शर्मा पर आरोप तय किया जाना उचित ठहराया।











