नाबालिक को बहला-फुसलाकर ले जाने व उसके साथ गलत काम करने वाले आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दण्डित किया गया
जबलपुर
न्यायालय विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट जबलपुर के न्यायालय द्वारा आरोपी निकेश कोल उर्फ निक्कू को थाना आधारताल के अप0 क्रं. 1338/2021 व विशेष प्रकरण क्रमांक 148/2021 अंतर्गत लैगिंक अपराधो से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3 सहपठित धारा 4(2) व धारा 366 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास व कुल 3000 रूपये अर्थदंड से दंडित किया।
घटना इस प्रकार है कि दिनांक 19.09.2021 को उत्तरजीवी की माता द्वारा थाना आधारताल में उत्तरजीवी की गुमशुदगी रिपोर्ट लेखबद्ध कराई गई थी कि दिनांक 19.09.2021 को सुबह 06ः30 बजे उसने देखा कि उत्तरजीवी घर पर नहीं है, जिसकी तलाश उसने संभावित स्थानों एवं नाते रिश्तेदारों में किया, किंतु उत्तरजीवी का कोई पता नहीं चला। उत्तरजीवी को कोई अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया होगा। उसे संदेह है कि उत्तरजीवी को निक्कू कोल बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया होगा और पहले भी उत्तरजीवी निक्कू कोल से बातचीत करती थी। उत्तरजीवी की माता द्वारा लिखाई गई गुमशुदगी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षी केन्द्र आधारताल के अपराध क्रमांक 1338/2021 अंतर्गत धारा 363 भादवि के तहत पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दिनांक 22.09.2021 को उत्तरजीवी को दस्तयाब किया गया, दस्तयाबी पंचनामा तैयार कर मुलाहिजा फाॅर्म भरकर परीक्षण हेतु एल्गिन अस्पताल भेजा। विवेचना के दौरान प्रकरण में आये तथ्यों के आधार पर धारा 366, 376(3) भादवि एवं पाॅक्सो एक्ट 3 सहपठित 4 एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की धारा 9 का इजाफा किया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र विचारण हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। उप-संचालक(अभियोजन) श्री विजय कुमार उईके व जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री अजय कुमार जैन के मार्गदर्शन में विशेष लोक अभियोजक/सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती मनीषा दुबे द्वारा उक्त मामले में शसक्त पैरवी की गई।
श्रीमती मनीषा दुबे विशेष लोक अभियोजक/सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी के तर्को से सहमत होते हुये न्यायालय विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट जबलपुर के न्यायालय द्वारा थाना आधारताल के अप0 क्रं. 1338/2021 व विशेष प्रकरण क्रमांक 148/2021 अंतर्गत लैगिंक अपराधो से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3 सहपठित धारा 4(2) में 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 2000 रू अर्थदण्ड एवं धारा 366 में 05 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000 रूपये अर्थदंड से दंडित किया।












