गजरथ फेरी के साथ पंचकल्याणक महा महोत्सेव का समापन
हटा दमोह
कुछ दिन पूर्व जिस पाषाण पर कारीगर अपनी छैनी हथोडी से प्रहार करते हुए उसे प्रतिमा का रूप दे रहा था, वह पत्थर जब मूर्ति का आकार लेती है और उसे छै दिन के धार्मिक अनुष्ठान से भगवान बना दिया जाता है तो इंसान जिसे सोचने समझने एवं कुछ करने सबका ज्ञान है वह भगवान क्यों नहीं बन पा रहा है।
मुनिश्री ने वनांचल वासियों से अपने जीवन में शाकाहार अपनाने का आव्हा्न किया और नशा व्यसन से दूर रहने को कहा।
आयोजन में निरंतर सहयोग करने वाले कार्यकर्ता स्वयंसेवियों का सम्मान आयोजक समिति के द्वारा किया गया।
मंगल देशना के उपरांत आयोजन स्थल पर गजरथ फेरी प्रारंभ हुई, सप्तम अश्व पर धर्मध्वोजा लेकर युवा चल रहे थे, गाजे बाजे के साथ मुनि संघ, रथ पर श्रीजी को लेकर सारे पात्र इन्द्र इन्द्राणी चल रहे थे, कुबेर इन्द्र द्वारा रत्नों की वर्षा की जा रही थी, बडी संख्याे में भक्त भी गजरथ फेरी में चल रहे थे, त्रय गजरथ के अतिरिक्त बग्गी में महोत्स्व के पात्र बैठे हुए थे।
आयोजन में आज आसपास के करीब २५ से अधिक गांवों के हजारों लोग पहुंचे, गजरथ फेरी के मनोरम क्षणों को सभी अपने अपने मोबाईल में कैद करने लगे हुए थे, गजरथ फेरी उपरांत संत निवास का भूमि पूजन भी किया गया।













